21वें गाजरघास जागरूकता सप्ताह-2026 के अंतर्गत खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर द्वारा 20–21 अगस्त 2026 को विभिन्न जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अंतर्गत 20 अगस्त को “गाजरघास का समेकित प्रबंधन” विषय पर राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में गाजरघास की पहचान, जीवविज्ञान, हानिकारक प्रभावों एवं समेकित प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई तथा समय पर प्रबंधन पर जोर दिया गया। इसके साथ ही शासकीय एम.एच. गृहविज्ञान एवं विज्ञान महिला महाविद्यालय, जबलपुर तथा सेंट एलॉयसियस कॉलेज, जबलपुर में 20 एवं 21 अगस्त को विद्यार्थी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 600 विद्यार्थियों एवं शिक्षण स्टाफ ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, किसानों एवं अन्य हितधारकों को गाजरघास के दुष्प्रभावों, इसके समेकित प्रबंधन के उपायों के प्रति जागरूक किया गया। विद्यार्थियों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसके माध्यम से उन्होंने गाजरघास के दुष्प्रभावों एवं इसके नियंत्रण के उपायों का प्रचार-प्रसार किया।
डॉ. जे. एस. मिश्र, निदेशक, ख. अ. नि., ने पोलियो उन्मूलन अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि गाजरघास का प्रभावी एवं वैज्ञानिक प्रबंधन व्यापक जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ही संभव है। डॉ. पी. के. सिंह, अध्यक्ष, गाजरघास जागरूकता सप्ताह, ने गाजरघास के प्रसार, हानिकारक प्रभावों और समय पर प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. समीर कुमार शुक्ला, प्राचार्य, गृहविज्ञान महाविद्यालय; डॉ. अनुराधा, विभागाध्यक्ष, कृषि विभाग; तथा डॉ. सोनाली निगम, विभागाध्यक्ष, सेंट एलॉयसियस कॉलेज भी कार्यक्रमों में उपस्थित रहे और जागरूकता अभियान को अपना समर्थन दिया।
डॉ. अर्चना अनोखे ने तकनीकी सत्र में गाजरघास का समेकित प्रबंधन पर जानकारी दी। रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से भाकृअनुप– ख. अ. नि., द्वारा यूट्यूब लाइव कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें देश भर के किसानों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और गाजरघास प्रबंधन के साथ-साथ कृषि एवं फसल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर प्रश्न पूछने का अवसर मिला। कार्यक्रमों के सफल आयोजन में डॉ. डी. वी. पवार, डॉ. जे. के. सोनी, डॉ. दीक्षा एम. जी., डॉ. सहदेव आई. के. एवं श्री एम. के. मीणा का सक्रिय सहयोग एवं समन्वय रहा।