भा.कृ.अनु.प.–खरपतवार अनुसंधान निदेशालय (DWR), जबलपुर द्वारा जनजातीय उप-योजना (TSP) के अंतर्गत “सीधी बुआई वाले धान में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण सह प्री-रबी कार्यशाला का आयोजन 16–17 सितंबर, 2026 को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खरपतवारों की पहचान, समेकित खरपतवार प्रबंधन तथा सीधी बुआई वाले धान में बेहतर फसल प्रबंधन तकनीकों के प्रति जागरूक करना था। प्रशिक्षण में मध्य प्रदेश के मंडला जिले के डुंगरिया, खुकरसर, मुदाडीह एवं सागर गांवों के कुल 28 किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम में डॉ. जे. एस. मिश्रा, निदेशक, भा.कृ.अनु.प.–खरपतवार अनुसंधान निदेशालय; डॉ. पी. के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं टी.एस.पी. नोडल अधिकारी; तथा डॉ. मृदुल चक्रवर्ती, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भा.कृ.अनु.प.–केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक ने सहभागिता की। डॉ. सुशील कुमार फुलिया, प्रधान वैज्ञानिक, भा.कृ.अनु.प.–केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार, ने भी ऑनलाइन माध्यम से समापन समारोह में भाग लिया। डॉ. पी. के. सिंह ने प्रतिभागी किसानों का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं रूपरेखा की जानकारी दी। अपने संबोधन में डॉ. जे. एस. मिश्रा ने मंडला जिले में चल रही टी.एस.पी. गतिविधियों पर संतोष व्यक्त किया तथा सीधी बुआई वाले धान में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन के माध्यम से बेहतर उपज प्राप्त करने के महत्व पर प्रकाश डाला। दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान खरपतवारों की पहचान, प्राकृतिक खेती एवं संरक्षण कृषि में खरपतवार प्रबंधन, जंगली धान का प्रबंधन, सीधी बुआई वाले धान में समेकित खरपतवार प्रबंधन तथा खरपतवारनाशियों का चयन, प्रभावी उपयोग एवं खरपतवारनाशी प्रतिरोध प्रबंधन रणनीतियों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। डॉ. मृदुल चक्रवर्ती ने ऑनलाइन माध्यम से शाकनाशी-सहिष्णु धान, विशेष रूप से CR Dhan 807, तथा गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तकनीक पर तकनीकी व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में किसानों को खेत की परिस्थितियों में खरपतवार प्रबंधन तकनीकों एवं उनके प्रयोग से परिचित कराने के लिए प्रक्षेत्र भ्रमण और व्यावहारिक प्रदर्शन भी आयोजित किए गए।
रबी-पूर्व कार्यशाला के अंतर्गत किसान–वैज्ञानिक तकनीकी संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ पैनल ने किसानों की जिज्ञासाओं एवं खेत-स्तरीय समस्याओं का समाधान किया। आगामी रबी मौसम की तैयारी, फसल योजना एवं प्रबंधन तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिससे किसानों को बेहतर फसल उत्पादन के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
डॉ. पी. के. सिंह ने प्रशिक्षण निदेशक के रूप में कार्य किया, जबकि डॉ. जे. के. सोनी, डॉ. जमालुद्दीन ए. एवं डॉ. सहदेव आई. के. एवं मुकेश कुमार मीना ने प्रशिक्षण के समन्वय में योगदान दिया। प्रशिक्षण का समापन औपचारिक समापन समारोह के साथ हुआ, जिसमें डशहरी, चौसा एवं अल्फांसो आम की पौध का वितरण प्रतिभागी किसानों को किया गया, जिससे कृषि विविधीकरण एवं किसान सहभागिता को प्रोत्साहन मिला।